May 16, 2026
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Shani Jayanti 2026: ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर आज देशभर में शनि जयंती श्रद्धा और आस्था के साथ मनाई जा रही है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन शनि देव का जन्म हुआ था. शनि देव को न्याय का देवता और कर्मफलदाता कहा जाता है, जो मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, शनि जयंती पर इस बार 13 साल बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है, दरअसल शनिवार के दिन शनि जयंती का योग बन रहा है. साथ ही सौभाग्य योग, शोभन योग, गजकेसरी योग समेत कई शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है, जिससे आज के दिन का महत्व और भी बढ़ गया है. आइए जानते हैं शनि जयंती का महत्व, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र और आरती…

शनि जयंती का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में शनि जयंती का विशेष महत्व माना जाता है. शनि देव को सूर्य देव और छाया का पुत्र बताया गया है. धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि शनि देव न्यायप्रिय हैं और अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार फल देते हैं. यही कारण है कि लोग इस दिन व्रत रखते हैं और विधि-विधान से पूजा कर जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं. मान्यता है कि शनि जयंती पर जरूरतमंदों की सहायता करने और दान-पुण्य करने से विशेष पुण्य फल मिलता है. इस दिन काला तिल, उड़द, सरसों का तेल, काले वस्त्र और लोहे का दान शुभ माना जाता है.

शनि जयंती 2026 आज
अमावस्या तिथि की शुरुआत – 16 मई, सुबह 5 बजकर 11 मिनट से
अमावस्या तिथि का समापन – 17 मई, देर रात 1 बजकर 30 मिनट तक
उदिया तिथि के आधार पर शनि जयंती का पर्व आज मनाया जा रहा है.

शनि जयंती पूजा मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 04:07 ए एम से 04:48 ए एम
अभिजित मुहूर्त: 11:50 ए एम से 12:45 पी एम
गोधूलि मुहूर्त: 07:04 पी एम से 07:25 पी एम
विजय मुहूर्त: 02:34 पी एम से 03:28 पी एम
निशिता मुहूर्त: 11:57 पी एम से 12:38 ए एम, 17 मई

शनि जयंती शुभ योग
शनि जयंती पर सौभाग्य योग, शोभन योग समेत कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे आज के दिन का महत्व बढ़ गया है. साथ आज 300 साल बाद शश महापुरुष योग, गजकेसरी योग, बुद्धादित्य योग, सौभाग्य योग और शोभन योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. इन शुभ योग में शनिदेव की पूजा अर्चना करने से हर सुख की प्राप्ति होती है और शनि दोष, शनि महादशा, शनि साढ़ेसाती व ढैय्या के अशुभ प्रभाव में कमी आती है.

शनि जयंती पूजा विधि 2026
शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें. इसके बाद शनि मंदिर जाएं या घर के पूजा स्थल पर शनि देव की प्रतिमा स्थापित करें.

  • सरसों के तेल का दीपक जलाएं
  • काला तिल और नीले फूल अर्पित करें
  • शनि मंत्रों का जाप करें
  • पीपल के पेड़ की पूजा करें
  • गरीब और जरूरतमंदों को दान दें
  • धार्मिक मान्यता है कि इस दिन हनुमान चालीसा और शनि स्तोत्र का पाठ करने से भी विशेष लाभ प्राप्त होता है.

शनि मंत्र

ॐ शं शनैश्चराय नमः॥

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र का 108 बार जाप करने से शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या के अशुभ प्रभाव में कमी आती है.

शनिदेव की आरती
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी ।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी ।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी ।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी ।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी ।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी ॥
॥ जय जय श्री शनिदेव..॥



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