April 9, 2026
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हिंदी सिनेमा का वो दिग्गज अभिनेता जिसने हर किरदार में जान फूंक दी. वो विलेन जिसके फिल्मों में होने से राजेश खन्ना को कास्ट करना मुश्किल हो जाता था. एक्टिंग ऐसी कि लोग उनके मुरीद हो जाते थे. इस एक्टर की एंट्री होते ही थिएटर तालियों से गड़गड़ा उठता था. अपनी फिल्मों में कास्ट करने लिए तो मेकर्स के बीच होड़ मची रहती थीं.

नई दिल्ली. एक्टिंग की दुनिया का वो सितारा जिसने पहचान विलेन के तौर पर बनाई. लेकिन असल जिदंगी में बेहद दरियादिल इंसान था. अपने हर किरदार से वह दर्शकों का दिल जीत लिया करते थे. जिस फिल्म में वह होते थे, वह हिट की गारंटी बन जाती थीं. जानते हैं क्या है उनका नाम.

अभिनेता प्राण की 12 फरवरी को जयंती है. साल 1920 में पुरानी दिल्ली के कोटगढ़ बल्ली मारा में जन्मे प्राण के पिता कृष्ण सिकंद सिविल इंजीनियर थे और मां रामेश्वरी गृहिणी. प्राण को पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली में एक फोटोग्राफी कंपनी में काम शुरू किया.

Dharmendra Pran

किस्मत ने लाहौर में उनका रास्ता बदल दिया. वहां एक दुकान पर फिल्म लेखक मोहम्मद वली से मुलाकात हुई. इसी मुलाकात ने उन्हें फिल्मों तक पहुंचा दिया. 1940 में पंजाबी फिल्म ‘यमला जट्ट’ में उन्हें हीरो का रोल मिला. फिल्म हिट रही और प्राण की गिनती उभरते सितारों में होने लगी. इसके बाद ‘चौधरी’, ‘खजानची’ और हिंदी फिल्म ‘खानदान’ में भी उन्होंने काम किया.

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लेकिन 1947 का बंटवारा उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ. लाहौर में बतौर हीरो जम चुके प्राण को सब कुछ छोड़कर मुंबई आना पड़ा. यहां उन्हें पूरे 8 महीने तक काम का इंतजार करना पड़ा. हालत ऐसे हो गए कि मरीन ड्राइव के एक होटल में काम करना पड़ा. आर्थिक तंगी का वो दौर बेहद मुश्किल था.

Dharmendra Pran

आखिरकार सादत हसन मंटो और अभिनेता श्याम की मदद से 1948 में बॉम्बे टॉकीज की फिल्म ‘जिद्दी’ मिली. देव आनंद और कामिनी कौशल स्टारर इस फिल्म में प्राण ने विलेन का रोल निभाया. यहीं से उनकी नई पारी शुरू हुई.

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इसके बाद तो प्राण हिंदी सिनेमा के सबसे दमदार खलनायक बन गए. दिलीप कुमार से लेकर अमिताभ बच्चन तक, हर बड़े स्टार के सामने उनका मुकाबला अलग ही दिखता था. ‘मधुमति’, ‘जॉनी मेरा नाम’, ‘जंजीर’ और ‘डॉन’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं.

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करीब पांच दशक के करियर में उन्होंने 360 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. 2001 में पद्म भूषण और 2013 में दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड से उन्हें सम्मानित किया गया. 12 जुलाई 2013 को उन्होंने आखिरी सांस ली, लेकिन सिनेमा में उनका नाम आज भी जिंदा है.

बता दें कि उस दौर में फिल्मों में एक साथ प्राण और राजेश खन्ना को कास्ट करना काफी मुश्किल होता था. क्योंकि राजेश खन्ना अपने स्टारडम के चलते मोटी फीस लिया करते थे. जिस वजह से बड़े मेकर्स ही उन्हें फिल्म में साइन करते थे. लेकिन प्राण ने उस दौर में राजेश खन्ना को भी टक्कर दे दी थी. मेकर्स इन दोनों को साथ किसी फिल्म में कास्ट करने से डरा करते थे.

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